Husn Shayari Collection

Husn Shayari Collection

हुस्न वाले वफ़ा नहीं करते, इश्क वाले दगा नहीं करते, जुल्म करना तो इनकी आदत है, ये किसी का भला नहीं करते |

ये उनके हुस्न की इन्तेहाँ थी…. या हमारी दीवानगी का आलम… के जब से उनको देखा है…. देखते ही रह गये….

अपने हुस्न पर मेरी जान गुरूर नहीं करती…. अरे कोई तो उसे बताओ… उस सा हसीं दुनिया में… कोई और नहीं,

हुस्न पर जब भी मस्ती छाती है; तब शायरी पर बहार आती है! पीके महबूब के बदन की शराब; जिंदगी झूम-झूम जाती है!

तुम सामने बैठी रहो, तुम्हारा हुस्न पीता रहूँ। मौत आ गयी जो दरमियाँ, मरकर भी मैं जीता रहूँ।

दिल्लगी नहीं शायरी जो किसी हुस्न पर बर्बाद करें, यह तो एक शमा है जो उस नूर का पयाम है.

कमसिनी का हुस्न था वो, ये जवानी की बहार पहले भी रुख पर यही तिल था मगर क़ातिल न था

जिन्दगी बैठी थी अपने हुस्न पै फूली हुई, मौत ने आते ही सारा रंग फीका कर दिया।

Husn Shayari Collection (2022)

Husn Shayari Collection (2022)

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