हुस्न शायरी, Husn Shayari Collection, Husn Shayari In Hindi 2 Line November 11, 2021 by admin

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हमे बिलकुल अप के लिए कुछ खास करना चाहिए इसलिए हम आपके लिए लेकर आए है हुस्न शायरी जिसे आप ग्रीटिंग कार्ड, व्हाट्सएप्प या फिर सोशल मीडिया पर लिख दे सकते है| यह बहुत ही शानदार और दिल को छू लेने वाली शायरी है |

हुस्न शायरी २ लाइन हिंदी

हुस्न वाले वफ़ा नहीं करते,
इश्क वाले दगा नहीं करते,
जुल्म करना तो इनकी आदत है,
ये किसी का भला नहीं करते |

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ये उनके हुस्न की इन्तेहाँ थी….
या हमारी दीवानगी का आलम…
के जब से उनको देखा है….
देखते ही रह गये….

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अपने हुस्न पर मेरी जान गुरूर नहीं करती….
अरे कोई तो उसे बताओ…
उस सा हसीं दुनिया में…
कोई और नहीं,

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हुस्न पर जब भी मस्ती छाती है;
तब शायरी पर बहार आती है!
पीके महबूब के बदन की शराब;
जिंदगी झूम-झूम जाती है!

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आपके हुस्न कि तारीफ में सोचता हूँ कुछ अल्फाज लिखूं ,
लिखा ना हो जो अब तक किसी ने ऐसा कुछ आज लिखूं ….
गीत लिखूं या गजल लिखूं ,
शायरी लिखूं या कलाम लिखूं ,
लिखने को बेचैन हूँ ,
पर समझ ना आए क्या लिखूं ….

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हुस्न अपने देखते हैं आईने में वो;
और ये भी देखते हैं, कोई देखता न हो;
कल चौदहवीं की रात थी,
रात भर रहा चर्चा तेरा;
कुछ ने कहा ये चाँद है,
कुछ ने कहा चेहरा तेरा!

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वो हुस्न जिसको देख के कुछ भी कहा न जाएदिल की
लगी उसी से कहे बिन रहा न जाए ।क्या जाने कब से
दिल में है अपना बसा हुआऐसा नगर कि जिसमें कोई रास्ता न जाए ।

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ये हुस्न तेरा ये इश्क़ मेरारंगीन तो है बदनाम सहीमुझ
पर तो कई इल्ज़ाम लगेतुझ पर भी कोई इल्ज़ाम
सहीइस रात की निखरी रंगत कोकुछ और निखर
जाने दे ज़रानज़रों को बहक जाने दे ज़राज़ुल्फ़ों
को बिखर जाने दे ज़राकुछ देर की ही तस्कीन
सहीकुछ देर का ही आराम सही

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पलट के देख ज़ालिम, तमन्ना हम भी रखते हैं;
हुस्न तुम रखती हो, तो जवानी हम भी रखते हैं;
गहराई तुम रखती हो तो लंबाई हम भी रखते हैं!

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मुझ को मालूम है तू हुस्न में लासानी हैसारी दुनिया
तेरी सौदाई है दीवानी हैतेरी आँखों में है कैफियत
ए जाम ए मयनाबसौ बहारों का है आईना तेरा हुस्न ए शबाब

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तराशा है उनको बड़ी फुर्सत सेजुल्फे जो उनकी
बादल की याद दिला दे नज़र भर देख ले जो
वोह किसी कोनेकदिल इंसान की भी नियत बिगड़ जाए.

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तुम सामने बैठी रहो,
तुम्हारा हुस्न पीता रहूँ।
मौत आ गयी जो दरमियाँ,
मरकर भी मैं जीता रहूँ।

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न कर शायरी को बदनाम हुस्न का नाम देकरयह
तो ख़ुदा का मुक़ाम है.जिस्म फ़रोशी नहीं शायरी
यह तो रूह का पयाम है.

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दिल्लगी नहीं शायरी जो किसी हुस्न पर बर्बाद करें,
यह तो एक शमा है जो उस नूर का पयाम है.

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कमसिनी का हुस्न था वो,
ये जवानी की बहार पहले भी
रुख पर यही तिल था मगर क़ातिल न था

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हुस्न को बे-हिजाब होना था शौक़ को कामयाब
होना था हिज्र में कैफ़-ए-इज़्तराब न पूछ ख़ून-ए-दिल
भी शराब होना था तेरे जल्वों में घिर गया आख़िर ज़र्रे
को आफ़ताब होना था कुछ तुम्हारी निगाह काफ़िर
थी कुछ मुझे भी ख़राब होना था

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क्यूँ रोज़ मुझसे मिलता ,
भोला सा एक चेहरावो हुस्न की बला सा
नज़रें गड़ाए चेहरा

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जिन्दगी बैठी थी अपने हुस्न पै फूली हुई,
मौत ने आते ही सारा रंग फीका कर दिया।

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तेरे हुस्न की क्या तारीफ़ करूँ तेरे हुस्न की क्या
तारीफ़ करूँ कुछ कहते हुए भी डरता हूँ कहीं
भूल से तू ना समझ बैठे की मैं तुझसे मोहब्बत करता हूँ.

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“Tere Husn Ko Perde Ki Zaroorat Hi Kya Hai Zaalim..
Kon Rehta Hai Hosh Main Tujhe Dekhne K Baad.?”

husn shayari 2 line hindi

Noor-E-Chand Hai Aaftaab Hai,
Uska Husn To Lajawab Hai,
Jinke Deed Ko Tarasti Hai Hamari Nigahein,
Wo Pari Hai Ya Mallika-E-Shabab Hai.

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“Kisi Husn Pari Kaa Andekhaa Sapanaa Hoon,
Dil MeiN Rah Ke Naa Jaagii Woh Tamannaa HooN,
Un Surkh Labon Talaq Jab Le Gayii Thi Kismat,
Chhuune Se Pehale Tuut Gayaa Woh Paimaanaa HooN.”

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“Jo tareef husn ki ho, jo deedar ho kisi ka
tabhi husn-o-rang shabab pe hota hai
wo jo aankho se peete hai wohi behekte hai
warna kahaa itna nasha sharaab se hota hai”

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“Nazakat-e-husn-e-janab ka tha aisa aalam,
Unhe hum dekhtay hi rahein ,ya unki tareef karein,
Rukhsar pe jab bhi zulfaien lehraye ,to hawa ne hatay hai,
Ehsaan manaye hawa ka, ya unki tareef karein.”

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“Uske Husn Ki Tareef Kya Karoon Main,
Kahin Nazar Na Lage,
Dekhta Hoon Chori Se Use,
Is Nazar Se Ke Use Khabar Na Lage,”

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“Taras gaye apke deedar ko
phir bhi dil aap hi ko yaad karta hai
humse khusnaseeb to apke ghar ka aaina hai
jo har roz apke husn ka deedar karta hai… “

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Woh Husn-E-Mujasam, kamal Os ki Aankhain
Srapa-E-Muhabbat jamal Os ki Aankhain,
Main jab bhi pochon Sawal Os sy koe Mujay
Rooz deti hain tall Os ki Aankain.

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“Khwaab Thaa Ya Khayaal Thaa Kyaa Thaa;
Hijr Thaa Ya Vishaal Thaa Kyaa Thaa!
Chamkee Bijlee Sie Par Na Samjhey Hum;
Husn Thaa Ya Jamaal Thaa Kya Thaa! “

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“Tutkar bikhar gaya,
Aashiyana hamara.
Chamanme phool kab khilegi,
Ruth gaya jo bagwan hamara.
Kismat ne kya gul khilayi,
Do palonme dil laga hamara.
Khuda ne ye husn Q banai,
Jo is kadar dil tuta hamara.”

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“Uske Husn Ki Tarif Mein Kya Kahiye
Koi Sehzadi Zamee Par Utar Aayi Hai
Ae Banane Wale Lagta Jaise
Koi Sangmarmar Ki Murat Tune Banayi Hai”

husn shayari 2021 in hindi

“Ish Husn Ka Deedar Ham Bar Bar Karten Hai,
Har Pal Ham Aapka Ikhtiyar Karten Hai,
Waqt Mila Tho Hamse Aytbaar Kar Lena,
Warna Aapka Intezar Tho Ham Har Bar Karten Hai.”

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“Sirf ek hi bat seekhi in Husn walo se
humne jiski jitni adaa hai,
w0h utna hi bewafa hai.. “

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“Tere Husn ko savarne ki zaroorat kya hai..
Sadgi mein bhi qayamat ki Ada hoti hai “

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“Tera Husn Bada Lajawaab Hai,
Ang Ang Khiltaa Gulaab Hai,
Bas Gaya Aankhon Mein Mere,
Chehra Teraa Maahataab Hai.”

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“Husn tere nakhare hazar,
Per Zindagi ke din hai char,
Do guzare tujhe pane main,
Do guzare manane main!”

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“Husn tere nakhare hazar,
Per Zindagi ke din hai char,
Do guzare tujhe pane main,
Do guzare manane main!”

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